प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 72 वर्ष के हो जाएंगे, लेकिन प्रधानसेवक के तौर पर नरेन्द्र मोदी का ये 9वां जन्मदिन है. आज बात प्रधानसेवक नरेन्द्र मोदी के उन 9 बड़े फैसलों की, जिन्होंने देश की दशा और दिशा को बदला.

सीमा पार स्ट्राइक

28 सितंबर 2016 से पहले भारत की छवि दुनिया में एक सॉफ्ट पॉवर नेशन की थी. हमारी सेना का शौर्य सदैव प्रबल रहा लेकिन इस बार उन्हें एक मज़बूत राजनैतिक नेतृत्व का भी साथ मिला. जम्मू कश्मीर के उड़ी सेक्टर में 18 सितंबर 2016 को पाकिस्तानी आतंकियों ने भारतीय सेना के मुख्यालय पर हमला कर दिया जिसमें हमारे 19 जवान शहीद और करीब 30 से ज्यादा घायल हुए. क्रॉस फायरिंग में चार आतंकी भी मारे गए. पूरे देश में इस घटना को लेकर ज़बरदस्त गुस्से का माहौल तो था लेकिन प्रधानसेवक मोदी ने जो किया वो तब तक किसी की कल्पना में भी नहीं था. मोदी की अध्यक्षता में एक हाईलेवल कमेटी की बैठक हुई जिसमें एक बहुत बड़ी जवाबी कारवाई को हरी झंडी दी गयी. 28 सितंबर 2016 को भारतीय सेना ने करारा जवाब देते हुए PoK में सर्जिकल स्ट्राइक की और आतंकवादी ठिकानों को तबाह किया. चुनौती फिर आयी तो जवाब फिर से दिया गया. जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी, 2019 को हुए आत्मघाती बम हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 40 जवान शहीद हुए. इसके ठीक 12 दिन बाद 26 फरवरी को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने LoC पार कर पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकवादी लांचिंग पैड को तबाह कर दिया. इस तरह के जवाब देने के लिए इससे पहले इजरायल और अमेरिका ही जाने जाते थे लेकिन प्रधानसेवक मोदी के नेतृत्व में पूरी दुनिया ने अब एक नए सशक्त सक्षम भारत को देख लिया था.

आर्टिकल 370 को खत्म किया

मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक कश्मीर से अनुच्छेंद 370 को हटाना भी है. भाजपा के घोषणा पत्र में ये मुद्दा ज़रूर था लेकिन ये वाकई इतनी जल्दी और इस पुख्ता तरीके से हो जाएगा इसकी किसी ने भी कल्पना नहीं की थी. भारत में विलय के बाद जम्मू कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से मीटिंग की और उसके जम्मू-कश्मीर के लिए संविधान के अंदर आर्टिकल 370 को जोड़ा गया जिसमें राज्य को अन्य राज्यों के मुकाबले कुछ विशेष अधिकार दिए गए लेकिन 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद-370 को निरस्त कर जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा वापस ले लिया. साथ ही राज्य को विभाजित कर दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का गठन किया. हाल ही में जम्मू कश्मीर में बोलते हुए गुलाम नबी आज़ाद ने जनता से कहा कि मैं आपको गुमराह नहीं करूंगा, हकीकत ये है कि 370 वापस नहीं आना.

कोरोना महामारी में ज़बरदस्त प्रबंधन

2020 के शुरू होते ही कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को संक्रमित करना शुरू कर दिया था. मार्च आते आते दुनिया भर में कोरोना की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहले 22 मार्च, 2020 को 14 घंटे के ‘जनता कर्फ्यू’ का आह्वाहन किया और फिर 24 मार्च, 2020 को 21 दिनों के लिए देश भर में संपूर्ण लॉकडाउन लगाने की घोषणा की. जनसँख्या के मामलें में दूसरे नंबर पर आने वाले भारत को लेकर दुनिया भर के विशेषज्ञ कह रहे थे कि सबसे ज्यादा तबाही यहीं मचेगी लेकिन कुशल कोरोना प्रबंधन के चलते भारत अमेरिका जैसे सर्वशक्तिमान देश से भी बेहतर हाल में रहा. खुद प्रधानमंत्री मोदी लगातार मास्क पहनने, सोशल डिस्टेंसिंग, पर्सनल हाइजीन, स्वच्छता और वैक्सीनेशन पर लोगो को प्रेरित करते रहे. वैक्सीन के बनने और 100 करोंड़ से ऊपर डोज़ के लगने के साथ ही भारत में इस महामारी के दौरान 80 करोड़ लोगों तक लगातार खाद्यान्न पहुंचाया गया. हम भले ही विकासशील देश हों लेकिन सरकार ने पूरा प्रयास किया कि किसी की भी गरीबी और भुखमरी के कारण मौत ना हो.

अन्त्योदय योजनाएं

15 अगस्त, 2014 को अपने पहले कार्यकाल के पहले साल प्रधानमंत्री मोदी ने हर परिवार को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने के लिए जनधन योजना की शुरुआत की जिसके तहत अब तक 45 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं. ख़ास बात ये है कि सरकार की सब्सिडी इन्हीं खातों में जा रही है, जिसने भ्रष्टाचार पर नकेल भी कसी वहीं गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों को 1 मई 2016 से शुरू हुई उज्ज्वला योजना के तहत अप्रैल-2022 तक 9 करोड़ से अधिक कनेक्शन बांटे जा चुके हैं. आयुष्मान भारत योजना में BPL परिवारों का 5 लाख रुपए तक कैशलेस स्वास्थ्य बीमा मिला जिसके तहत अब तक 10 करोड़ परिवारों के 50 करोड़ सदस्यों को लाभ मिल चुका है. ये सारी योजनायें समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के लिये थी जो अब तक भय भूख और भ्रष्टाचार का शिकार होता आया था.

‘तीन तलाक’ खत्म

1 अगस्त “मुस्लिम महिला अधिकार दिवस” के रूप में मनाया जा रहा है क्योंकि मोदी सरकार ने 30 जुलाई 2019 को संसद से “तीन तलाक” के खिलाफ कानून पारित कर मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2019 का नाम दिया जिसके मुताबिक तीन तलाक अवैध है. विशेषज्ञ मानते हैं कि “तिलाके बिद्दत” ना तो संवैधानिक तौर से ठीक था, ना ही इस्लाम के नुक्तेनजर से जायज़ था. इससे पहले भी देश में सती प्रथा, बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने के लिए भी कानून बनाये गए. मोदी सरकार के इस फैसले से मुस्लिम महिलाओं को बहुत बड़ा सामजिक बल मिला क्योंकि बीते कई सालों से मौखिक रुप से तीन बार तलाक़ कह कर तलाक देना, पत्र या फ़ोन के जरिये, यहाँ तक की मैसेज, व्हाट्सऐप के जरिये तलाक़ दिए जाने के मामले सामने आने लगे थे जो कि किसी भी संवेदनशील समाज के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकते.

अर्थव्यवस्था को रफ़्तार

8 नवंबर, 2016 की शाम 8 बजे प्रधानमंत्री मोदी ने 500 रुपये और 1000 रुपये के नोट को तत्काल प्रभाव से बंद करते हुए 500 रुपये और 2000 रुपये के नए नोट को जारी करने का एलान किया. कालेधन की पकड़ के लिए चलाये गए नोटबदली के इस विशेष अभियान का फायदा भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के अलावा ये भी हुआ कि देश में डिजिटल पेमेंट करने का चलन तेजी से बढ़ा. आज देश में डिजिटल लेनदेन का सबसे बड़ा जरिया यूपीआई है और एनपीसीआई की ओर से जारी आंकड़ों मुताबिक अगस्त में यूपीआई के जरिए होने वाला लेनदेन 10.5 लाख करोड़ के स्तर को भी पार कर गया. आर्थिक मोर्चे पर मोदी मन्त्र पूर्ववर्ती सरकारों से हट कर है. खुद प्रधानमंत्री कई मौकों पर कह चुके हैं कि नये भारत के युवा “जॉब सीकर” से ज्यादा “जॉब क्रियेटर” होने चाहिए. इसी विजन के चलते बीतें कुछ वर्षों में अर्थव्यवस्था और रोजगार पर मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया जैसे कई इनीशिएटिव लिए गए और इनका ग्रोथ पर सकारात्मिक असर भी पड़ा है. इस साल आये आंकड़ो के मुताबिक भारत की GDP 13.5 फीसदी की दर से बढ़ी है और भारत दुनिया की सबसे मज़बूत पांच अर्थव्यस्थाओं में आ गया है. आज भारत में 70 हजार स्टार्टअप और सौ से अधिक यूनीकार्न हैं. “ईज़ ऑफ़ डूइंग बिजनेस” के कारण दुनिया भर की बड़ी कंपनियों के रुझान का केंद्र भारत तेजी से बन रहा है. खिलौनों से लेकर रक्षा उपकरणों तक भारत आज आत्मनिर्भर बनने की रह पर है.

नया भारत-नया टैक्स सिस्टम

देश की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को एक बार में बदल देना वाला जीएसटी मोदी सरकार के सबसे बड़े फैसलों में से एक है. जानकारों की मानें तो 1 जुलाई 2017 को लागू हुई GST व्यवस्था से प्रत्यक्ष कर की कई जटिलताओं दूर हुई और कारोबार करना आसान हुआ. सरल शब्दों में समझें तो पूरे देश में एक कर व्यवस्था हो गयी जिससे देश में वस्तुओं और सेवाओं का प्रवाह पहले के मुकाबले आसान हुआ. इस नई प्रणाली से ना केवल 17 तरह के अलग अलग टैक्स खत्म हो गए बल्कि छोटे उद्योग-धंधों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 40 लाख रुपये के सालाना टर्नओवर वाले बिजनेस को जीएसटी के दायरे से मुक्त भी रखा. टैक्स कलेक्शन के मामलें में भी जीएसटी शानदार साबित हो रहा है. मई 2022 में जीएसटी से सरकार को करीब 1.41 लाख करोड़ रुपये प्राप्त हुए जो पिछले साल की मई की तुलना में 44% ज्यादा है.

केंद्र में किसान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं में किसानों के मुद्दे विशेषकर छोटे किसानों के हित प्रखर होते हैं. आज देश में खाद्यान्न का उत्पादन लगातार ना केवल रिकॉर्ड स्तर पर है बल्कि कृषि का निर्यात भी लगातार बढ़ रहा है. इसके पीछे किसानों को ध्यान में रखकर बनाई गयी योजनायें और फैसलों की अहम् भूमिका है. छोटे किसानों के लिए पीएम किसान सम्मान निधि योजना शुरू की गयी जिसका लाभ उन किसानों को हुआ है, जिनके पास 2 हेक्टेयर से कम जमीन है. इस योजना के तहत सरकार किसान परिवारों को हर साल 6 हजार रुपए दे रही है, जो हर चार महीने में 2-2 हजार रुपए की किस्त के रुप में दिए जाते हैं. ये पैसा सीधे किसान के खातों में पहुंचता है जिससे भ्रष्टाचार की संभावना बहुत कम हो जाती है. आंकड़ों के मुताबिक इस योजना के तहत लगभग साढ़े 11 करोड़ किसानों को 1.82 लाख करोड़ रु. सीधे उनके बैंक खातों में मिले. इसके अलावा सरकार ने खरीफ, रबी व अन्य वाणिज्यिक फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में लगातार वृद्धि की जिसका फायदा सीधे किसानों को मिला वहीं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ने किसानों को फसल के नुकसान पर भी बीमा कवच दिया.



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