रिपोर्ट- रोहित भट्ट

अल्मोड़ा. उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले को उसकी संस्कृति और उसकी विशेष पहचान के लिए जाना जाता है. अल्मोड़ा शहर में आपको वैसे तो कई रेस्टोरेंट देखने को मिलेंगे, लेकिन आज हम आपको एक ऐसे रेस्टोरेंट के बारे में बताने जा रहे हैं, जो लजीज पकवान तो परोसता ही है साथ ही कुमाऊंनी संस्कृति का भी प्रचार-प्रसार कर रहा है. पहाड़ के कल्चर की झलक दिखलाते इस रेस्टोरेंट का नाम बैठक (Cafe Baithak, Almora) है. कम समय में यह रेस्टोरेंट युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो गया है.

अल्मोड़ा के गोविंद बल्लभ पंत पार्क के पास बैठक कैफे स्थित है. यहां आपको कुमाऊंनी संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी. मसलन-लोककला ऐंपण, कुमाऊं के वाद्ययंत्र ढोल-दमाऊ बजाते हुए कलाकारों की तस्वीरें और पहाड़ की अनूठी संस्कृति को दिखलाती विभिन्न आकृतियां देखने को मिलती हैं. इन दिनों अल्मोड़ा में सभी की जुबान पर बैठक रेस्टोरेंट का ही जिक्र है. जबकि युवा से लेकर बुजुर्ग तक यहां आते हैं.

इस कैफे की खूबसूरती के साथ यहां पहुंचने वाले लोग खूब फोटो-वीडियो लेते हैं. इसके अलावा इस रेस्टोरेंट में आपको किताबों और गेम्स की सुविधा भी मिलती है. यहां आप चाय-कॉफी की चुस्की लेते हुए किताबें पढ़ सकते हैं और बच्चों के मनोरंजन के लिए गेम्स रखे हुए हैं. बैठक रेस्टोरेंट का फास्ट फूड लोगों को इतना पसंद आता है कि एक बार खाने के बाद वह बार-बार यहां आते हैं.

कुमाऊंनी संस्कृति बनी पहचान
बैठक कैफे के ग्राहक डॉ पूरन जोशी ने बताया कि वह कई बार इस रेस्टोरेंट में आ चुके हैं. उन्हें यहां कुमाऊंनी संस्कृति की झलक देखने को मिली, जो अक्सर अन्य किसी रेस्टोरेंट में देखने को नहीं मिलती है. यहां उन्होंने ग्राहकों के लिए किताबों का कलेक्शन देखा, जो उन्हें काफी अच्छा लगा. वहीं, कैफे मालिक सुलभ साह ने बताया कि उन्होंने इस रेस्टोरेंट की शुरुआत करीब डेढ़ साल पहले की थी. उनकी सोच थी कि कहीं न कहीं अपने कल्चर को वह दिखाएं और लोगों को बता सकें. इसके बाद उन्होंने इस कैफे की शुरुआत की. इस कैफे में अल्मोड़ा के पोस्ट ऑफिस के पास लगे बोगनवेलिया और देवदार के पेड़ की मनमोहक तस्वीर को लगाया गया है, जिससे उसकी याद ताजा रह सके.

Cafe Baithak Almora

Tags: Almora News, Food business, Street Food



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