हाइलाइट्स

देश के नए अटाॅर्नी जनरल मुकुल रोहतगी 1 अक्टूबर को पद ग्रहण करेंगे
उससे पहले कानून मंत्रालय ने सभी विभागों को पत्र लिखकर दिया निर्देश
विभागों को अपने कानूनी मामलों को पहले AG के सामने पेश करना होगा

नई दिल्लीः वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी देश के अगले अटॉर्नी जनरल (महान्यायवादी) नियुक्त होने वाले हैं. वह एक अक्टूबर को यह पद संभाल लेंगे. वह जून 2014 से जून 2017 के बीच देश के अटॉर्नी जनरल रह चुके हैं. बता दें कि रोहतगी वर्तमान अटॉर्नी जनरल के.के वेणुगोपाल की जगह लेंगे. उनका दूसरा कार्यकाल शुरू होने से पहले कानून मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लिया है. अपने एक आदेश में कानून मंत्रालय ने सभी विभागों से कहा है कि वे कानूनी मामलों को सबसे पहले अटॉर्नी जनरल के सामने पेश करें. इसकी पूरी सूची उन्हें सौंपी जाए, ताकि वह तय कर सकें कि किन-किन मामलों में अदालत में उनका खुद मौजूद रहना जरूरी है.

आदेश में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट में रोजाना पेश किए जाने वाले मामलों को सबसे पहले देश के अटॉर्नी जनरल के सामने सूचीबद्ध किया जाएगा. पहले अटॉर्नी जनरल अपने लिए केस को चुनेंगे, इसके बाद सॉलिसिटर जनरल अन्य मामलों को खुद के लिए चुनेंगे. इसके साथ ही वह बचे हुए मामलों का बंटवारा एडिशनल सॉलिसिटर जनरल और सरकारी वकीलों को करेंगे. एडिशनल सॉलिसिटर जनरल या सरकारी वकील या तो कोर्ट में अकेले पेश होंगे और या फिर अटॉर्नी जनरल या सॉलिसिटर जनरल के साथ पेश होंगे. कानून मंत्रालय के कानूनी मामलों से संबंधित विभाग ने इस संबंध में 13 सितंबर को पत्र जारी कर सभी विभागों को निर्देशित किया था और सेंट्रल एजेंसी सेक्शन के अफसरों से कहा था कि वे इस पूरी प्रक्रिया का पालन सख्ती से करें.

केंद्र ने बढ़ाया था केके वेणुगोपाल का कार्यकाल
अटॉर्नी जनरल का कार्यकाल आमतौर पर तीन वर्ष का होता है. लेकिन केके वेणुगोपाल का कार्यकाल केंद्र सरकार ने बढ़ाया था. साल 2020 में जब अटॉर्नी जनरल के तौर पर वेणुगोपाल का पहला कार्यकाल खत्म हुआ था, तब उन्होंने सरकार से अपनी आयु का हवाला देते हुए जिम्मेदारियों से मुक्त करने का अनुरोध किया था. बाद में उन्होंने एक साल का नया कार्यकाल स्वीकार कर लिया था, क्योंकि सरकार उनके द्वारा संभाले जा रहे चर्चित मामलों और उनके विशाल अनुभव को देखते हुए उन्हें पद पर बरकरार रखना चाहती थी. जहां तक बात मुकुल रोहतगी की है, तो वह एक अनुभवी वकील हैं और शीर्ष अदालत के साथ-साथ देशभर के उच्च न्यायालयों में कई चर्चित मामलों में सरकार का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.

मुकुल रोहतगी ने जकिया जाफरी मामले में SC में की थी SIT की पैरवी
मुकुल रोहतगी ने 2002 के गुजरात दंगों से संबंधित जकिया जाफरी की याचिका पर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के दौरान विशेष जांच दल एसआईटी की पैरवी की थी. कांग्रेस नेता एहसान जाफरी की गुजरात दंगों के दौरान 28 फरवरी, 2002 को अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसाइटी में हुई हिंसा में हत्या कर दी गई थी. इस मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी समेत 64 लोगों को क्लीन चिट दे दी थी, जिसके खिलाफ दिवंगत कांग्रेसी नेता की पत्नी जकिया ने शीर्ष अदालत का रुख किया था. इस साल जून में उच्चतम न्यायालय ने प्रधानमंत्री मोदी और 63 अन्य को दी गई एसआईटी की क्लीन चिट को बरकरार रखा था.

Tags: Attorney General, Government of India, Law



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