भोपाल. विधानसभा चुनाव की तैयारी में लगी कांग्रेस को मध्यप्रदेश में एक और झटका लगा है. कमलनाथ के करीबी वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक अरुणोदय चौबे ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है. अरुणोदय चौबे ने पीसीसी चीफ कमलनाथ को अपना इस्तीफा भेजा है. उन्होंने लिखा- खुरई की घटना से मैं और कांग्रेस कार्यकर्ता सब दुखी हैं.

कार्यकर्ताओं के साथ बर्ताव से दुखी हो कर इस्तीफा 
अरुणोदय चौबे 30 साल से कांग्रेस पार्टी में सक्रिय हैं. वो खुरई विधानसभा क्षेत्र से लगातार कांग्रेस पार्टी की सेवा कर रहे हैं. इस्तीफा देने के साथ पूर्व विधायक अरुणोदय चौबे ने कमलनाथ को भेजे अपने पत्र में लिखा – मैं करीब 30 साल से निरंतर कांग्रेस पार्टी की सेवा कर रहा हूं. हाल ही में खुरई विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ जो भी बर्ताव हुआ, उसमें मैं स्वयं और खुरई विधानसभा क्षेत्र के सभी कार्यकर्ता दुखी हैं. मैं प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष, प्रभारी जिला टीकमगढ़ और प्रदेश कांग्रेस के सदस्य सभी पदों से इस्तीफा दे रहा हूं.

कमलनाथ के करीबी रहे अरुणोदय चौबे 
पूर्व विधायक अरुणोदय चौबे ने भले ही कांग्रेस पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया हो. लेकिन वो पीसीसी चीफ कमलनाथ के बेहद करीबी रहे हैं. साल 2008 में अरुणोदय चौबे ने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी को मात दी थी. वो लगातार भाजपा के भूपेंद्र सिंह के सामने प्रतिद्वंदी के रूप में खड़े होते रहे हैं. हालांकि एक ही बार अरुणोदय चौबे को जीत हासिल हुई. हाल ही में पृथ्वीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भी ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की जिम्मेदारी कांग्रेस ने अरुणोदय चौबे को सौंपी थी.

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कांग्रेस का आरोप-बीजेपी प्रताड़ित कर रही थी
कांग्रेस विधायक पीसी शर्मा ने कहा अरुणोदय चौबे वरिष्ठ नेता हैं. उन्हें बीजेपी के नेता और मंत्री लगातार प्रताड़ित कर रहे थे. साल 2008 में उनके खिलाफ 302 का प्रकरण दर्ज कराया. बीजेपी लगातार नगरीय निकाय चुनाव में भी दबाव डालती रही है. सुरखी में एक भी जगह पर कांग्रेस का प्रत्याशी खड़ा नहीं होने दिया.अरुणोदय चौबे को बीजेपी खरीद नहीं पाई तो इस तरीके से प्रताड़ित करने की कोशिश की गयी. वो कमलनाथ के बेहद करीबी रहे हैं. उन्हें मनाने की पूरी कोशिश की जाएगी.

बीजेपी ने किया स्वागत
अरुणोदय चौबे के कांग्रेस छोड़ने पर भाजपा सरकार में मंत्री विश्वास सारंग ने कहा अरुणोदय चौबे का कांग्रेस छोड़ना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है. जो सार्वजनिक कार्यकर्ता के रूप में जनता का कल्याण करना चाहता है, वो सब अब कांग्रेस में नहीं रहना चाहते हैं. बीते 6 महीने से लगातार नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस छोड़ रहे हैं. कांग्रेस के पास कोई नीति नहीं है. नेता, नीति और नियत के अभाव में कांग्रेस कंगाल हो गई है. अरुणोदय चौबे को कांग्रेस छोड़ने पर मैं बधाई देना चाहता हूं, क्योंकि वह समाज की सेवा करना चाहते हैं.

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